जानिए एक विवाहित हिन्दू बेटी के पिता की संपत्ति पर क्या अधिकार हैं?

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हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 में हुए संशोधन के अनुसार विवाहित बेटी माता-पिता की संपत्ति में अधिकार रखती है! यह अधिनियम 9 सितंबर 2005 के बाद से लागू हुआ है!

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 मूल रूप से बेटियों को पैतृक संपत्ति के समान अधिकार नहीं देता! यह असमानता 9 सितंबर, 2005 को अधिनियम में हुए संशोधन के बाद हटाई गयी है!

यह मामला मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह एवं अन्य न्यायाधीशों एमएस संकलेचा और एमएस सोनाक की पीठ के समक्ष आया!

एक खंडपीठ ने कहा कि 9 सितंबर, 2005 को या उसके बाद पैदा हुई बेटियों के लिए यह संशोधन लागू होगा! 9 सितंबर 2005 से पहले पैदा हुई बेटियों के संबंध में, न्यायाधीशों का मानना ​​था कि उन्हें संपत्ति में हिस्सा उनके पिता या परिवार के मुखिया की 9 सितंबर, 2005 या उसके बाद मृत्यु होने पर मिलेगा!

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बेंच के अंतिम शब्द:

पूर्ण बेंच ने इस बात से असहमत होते हुए कहा की निरपेक्ष बेटियों की जन्म तिथि, बेटियां पूर्वजों की संपत्ति में समान हिस्सेदारी होंगी!

अब पहले मामले के अनुसार, जो सम्पति आपके दादाजी ने अपने जीवन काल में उपहार के रूप में दी है, उसमें आपकी मां और भाई, सम्पति के शेयर का दावा नहीं कर सकते I हालांकि आपके दादाजी के दूसरे घर और भूखंड पर उनके सभी बच्चों (जैसे आपकी मां और 1 भाई सहित 3 बहनों) का समान अधिकार है !

बेटे को अपने पिता द्वारा मिला उपहार पैतृक संपत्ति का हिस्सा नहीं है, क्योंकि बेटा दादा की मृत्यु पर संपत्ति का वारिस नहीं बनता है और न ही दादा द्वारा अपने जीवनकाल के दौरान विभाजन के द्वारा इसे प्राप्त करता है! इस सम्पति पर पोते  का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, क्योंकि उनके दादा ने अपने पुत्र को  एक पक्ष देने का फैसला किया था, जिसे वह किसी अन्य व्यक्ति को भी दे सकता था!

क्या भारत में बेटी पिता की संपत्ति का दावा कर सकती हैं?

यदि पिता की मृत्यु हिंदू कानून के संशोधन के बाद हुई है तो बेटी पिता की पैतृक संपत्ति में एक सहभागिता बन सकती है! नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार बेटियां केवल तभी पैतृक संपत्ति का दावा कर सकती हैं, यदि उनके पिता की मृत्यु हिंदू कानून के संशोधन 3 नवंबर, २०१५ के बाद हुई हो!

क्या शादीशुदा बेटी पिता की स्वयं अधिकृत संपत्ति में दावा कर सकती है?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि पिता की मृत्यु हिंदू कानून 2005 में हुए संशोधन के पहले हुई है तो  बेटी को संपत्ति में अधिकार नहीं मिलेगा जबकि यदि उसकी कोई बहन है तो वो  किसी भी विल या वसीयतनामा के दस्तावेज़ों के अभाव में पिता की स्वयं-अधिकृत संपत्ति में समान हिस्सेदारी का दावा कर सकती है!

बिना वसीयत के मृत्यु होने पर सम्पत्ति का क्या होगा?

यदि कोई व्यक्ति वसीयत या विल बनाये बिना मर जाता है, तो आप जहां रहते हैं, उस राज्य के आक्षेप कानून तय करेंगे कि आपकी संपत्ति को आपकी मौत पर कैसे वितरित किया जाए! इसमें मौत के समय आपके पास मौजूद कोई भी बैंक खाता, प्रतिभूतियां, रियल एस्टेट और अन्य संपत्ति शामिल होती है!

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